ये सारे अच्छे आयडीआज़ परीक्षा हॉल में ही क्यूँ आते हैं
इधर आपने नोट करने के लिए सर झुकाया नहीं कि उधर खुसर फुसर शुरू। अब खड़े रहिए चौकस चौकन्ने पूरे तीन घंटे, पीजिए चाय
सोच रही हूँ चाय ना होती तो हम मास्टरों का क्या होता !!
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इससे पहले कि इस सदी की किताब बंद हो ऐसा कुछ करें कि हमारे हिस्से के सफ़े कोरे ही न छूट जाएँ !! ......... ........ ( कात्यायनी)
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एक फ़ुरसत अलबेली की लता प्रियतमा, अनामिका जी को अलबेली की गणगौर
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उदासियों पर नहीं चढ़ते रंग, डुबोती ही जाती है बेचैनी-सी कोई। उसने बात ही बात में एक बात कही और बिलकुल ठीक कही- ‘दुःख हमारी दुनिया बदलते हैं’


